शास्त्रीय भाषा के उपयोग – चुनौतियाँ:

आधुनिक उपयोग में कमी: कई शास्त्रीय भाषाओं का आधुनिक दैनिक जीवन में उपयोग सीमित हो गया है। युवा पीढ़ी की रुचि: युवा पीढ़ी को इन भाषाओं के प्रति आकर्षित करना एक चुनौती हो सकती है। संसाधनों की कमी: इन भाषाओं के शिक्षण और अनुसंधान के लिए पर्याप्त शिक्षकों और संसाधनों की कमी हो सकती है। आधुनिकीकरण की आवश्यकता: शास्त्रीय भाषाओं को आधुनिक आवश्यकताओं के अनुसार विकसित करने की आवश्यकता हो सकती है। कार्यान्वयन में कठिनाई: शास्त्रीय भाषा के दर्जे से प्राप्त लाभों को प्रभावी ढंग से लागू करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।